सांसद निधि के 89 लाख घोटाला मामला: शाखा प्रबंधक की अग्रिम जमानत याचिका खारिज

सांसद निधि के 89 लाख घोटाला मामला: शाखा प्रबंधक की अग्रिम जमानत याचिका खारिज

Chhapra: सांसद निधि के 89 लाख घोटाला मामले में शाखा प्रबंधक की अग्रिम जमानत याचिका खारिज हो गयी है. इस कांड को लेकर नगर थाना में कांड संख्या 625/20 अंदर दफा 419, 420, 467, 468, 120 बी दर्ज है. 

धोखाधड़ी मामले में बैंक ऑफ बड़ौदा के शाखा प्रबंधक प्रभात कुमार की अग्रिम जमानत याचिका 511/21 की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश तृतीय नलिन कुमार पांडे के न्यायालय में हुई सुनवाई के पश्चात उनकी अग्रिम जमानत याचिका कोर्ट ने खारिज कर दी.

शाखा प्रबंधक द्वारा जिला एवं सत्र न्यायाधीश कृष्ण कांत त्रिपाठी के न्यायालय में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल किया गया था सुनवाई के पश्चात उन्होंने अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश तृतीय के न्यायालय में स्थानांतरित कर दिया था.

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विदित हो कि सांसद जनार्दन सिंह सिग्रीवाल के योजना का 89 लाख रुपया जिला योजना पदाधिकारी सारण के पदनाम से संधारित सरकारी खाता बैंक ऑफ बड़ौदा में रखा गया था. 23 नवंबर 2020 को बैंक के स्टेटमेंट के मिलान के दौरान पता चला कि 4 नवंबर 2020 को चेक नंबर 212 से 42 लाख एवं चेक न -211 से 45 लाख कुल 89 लाख फर्जी तरीके से संदीप भोगीलाल कोठारी स्वदेशी के नाम से हस्तांतरित कर दी गई है परंतु जिला योजना पदाधिकारी द्वारा बैंक ऑफ बड़ौदा छपरा के चेक का मिलान किया गया तो चेक संख्या 211 से लेकर 225 तक का चेक कार्यालय में सुरक्षित रखा हुआ था. जिसको लेकर जिला योजना पदाधिकारी सारण बिधान चंद्र राय ने दिनांक 25 नवम्बर 2020 को शाखा प्रबंधक एवं अन्य पर प्राथमिकी दर्ज की थी.

विदित हो कि बैंक ऑफ बड़ौदा के मुम्बई शाखा प्रबंधक द्वारा इस कांड को लेकर मुंबई के ठाणे थाना में भी एक प्राथमिकी संख्या -7646 दिनांक 25 नवंबर 2020 को अंदर दफा 420, 467, 468 ,471 के अंतर्गत दाखिल किया गया था. जिसमें अहमदनगर निवासी संदीप भोगीलाल कोठारी एवं गणेश गावडे को आरोपी बनाया गया था. जिससे इनको पुलिस ने वहां गिरफ्तार की गई थी. इन्ही के खाते मे उक्त राशि की निकासी हुई थी. बाद मे छपरा नगर थाना के इस कांड के अनुशंधान कर्ता ने 19 नवंबर 2020 को मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के यहां एक आवेदन दिया था. जिसमें उन्होंने प्रोडक्शन वारेंट निर्गत करने का निवेदन किया था. जिसे मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी ने स्वीकृत कर दिया था. उक्त राशि की निकासी मुम्बई शाखा से की गई थी. इसलिए दोनों जगहों पर प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी.

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