रेलवे के दावों की खुली पोल, छपरा जंक्शन पर बदहाल हुई यात्री सुविधा

छपरा: ‘रेल महाप्रबंधक के आने पर छपरा जंक्शन को दुल्हन की तरह सजाया जाता है पर उनके जाते ही यहाँ की स्थिति बदहाल हो जाती है. जंक्शन में मैकेनाइज्ड लॉन्ड्री, फ़ूड प्लाजा, शॉपिंग मॉल, स्कलेटर जैसी आधुनिक सुविधाओं की बात करने वाली रेल प्रशासन छपरा के यात्रियों को मूलभूत सुविधाऍं भी उपलब्ध नहीं करा पा रही है. छपरा जंक्शन के विकास के लिए किये जा रहे दावों की पोल खोलती एक रिपोर्ट’..

छपरा जंक्शन पर बेहतर यात्री सुविधाओं को लेकर रेलवे द्वारा किये गए तमाम दावों की पोल खुल रही है. A श्रेणी का दर्जा मिलने के बावजूद छपरा जंक्शन की बदहाल स्थिति स्टेशन को उन्नत बनाने के सभी वादों पर सवालिया निशान खड़ा कर रही है. मेकेनाइज्ड लॉन्ड्री और स्कलेटर जैसी अत्याधुनिक सुविधाओं की बात करने वाली रेलवे अपने यात्रियों को न बेहतर टिकटिंग व्यवस्था दे पा रही है और नाही बेहतर सुरक्षा प्रदान कर पा रही है.

टिकट काउंटर का हमेशा रहता है आभाव

वैसे तो छपरा जंक्शन पर यात्रियों को टिकट प्राप्त करने के लिए दर्जनों काउंटर बने हैं पर शायद ही कोई ऐसा दिन होगा जब यहाँ 2 से ज्यादा काउंटर खोले जाते हैं. काउंटर के आभाव में हर दिन लंबी-लंबी कतारे देखने को मिलती है. rly2

 अगर किसी यात्री को जल्दबाजी में टिकट लेना हो तो छपरा जंक्शन से तो मिलने से रहा. हाँ, इस बदहाल व्यवस्था से स्टेशन के बाहर प्राइवेट टिकट काउंटर वालों को जरूर फायदा पहुँचता है. rly1इन टिकट काउंटरों पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी यात्री परेशान दिखते हैं. रेलवे पुलिस सुरक्षा को लेकर नदारद रहती है. अत्यधिक भीड़ हो जाने से टिकट कटाने के लिए खड़े यात्रियों में पॉकेटमारों और चोर-उचक्कों का भय बना रहता है.

बंद पड़ी है टिकट वेंडिंग मशीन

कुछ दिन पूर्व ही बड़े ताम-झाम के साथ केंद्रीय मंत्री राजीव प्रताप रूड़ी और पूर्वोत्तर रेलवे महाप्रबंधक के उपस्थिति में छपरा जंक्शन पर टिकट वेंडिंग मशीन लगाया गया था पर उद्घाटन के कुछ दिन बाद ही जंक्शन परिसर में लगी अधिकतर वेंडिंग मशीने मेंटेनेन्स के अभाव में ख़राब हो चुकी है. इस वजह से भी टिकट काउंटर पर काफी रस्समकसी देखने को मिलती है. rly6

डिस्प्ले बोर्ड भी है बंद

यात्रियों को ट्रेनों से सम्बंधित जानकारी मुहैया कराने वाले डिस्प्ले बोर्ड भी ख़राब हो चुका है जिससे यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है. वहीँ रेलवे बोर्ड अपनी हर मीटिंग में डिस्प्ले बोर्ड को सुचारू रूप से चलाने को लेकर सिर्फ योजनाओं की ही बात करता है.

सही सूचना के आभाव में हो जाती है अफरातफरी

छपरा जंक्शन पर सबसे ज्यादा बेहाल स्थिति में पूछताछ काउंटर है. ट्रेनों के आवागमन को लेकर यहाँ से दी जाने वाली सूचना से यात्रियों में असमंजस की स्थिति बनी रहती है. rly5 कई बार तो ट्रेन आने के कुछ मिनट पहले ही प्लेटफॉर्म की स्थिति बदल दी जाती है जिससे यात्रियों में अफरातफरी का माहौल बन जाता है.

स्टेशन के सामने की सड़क गड्ढे में तबदील

छपरा जंक्शन के सामने इंट्री गेट बरसात के दिनों में पूरी तरह तालाब में तबदील हो जाता है वहीँ परिसर के सामने बड़े-बड़े गड्ढे यात्रियों के लिए आये दिन समस्या खड़ी करता है. rly3 जब भी कोई बड़ा अधिकारी निरीक्षण में आता है तो स्थानीय रेल प्रशासन द्वारा इन गड्ढों में मिट्टी भर कर महज खानापूर्ति कर दी जाती है. 

5 अक्टूबर को एक बार फिर छपरा जंक्शन को दुल्हन की तरह सजाया जाएगा क्योंकि इस दिन रेल महाप्रबंधक राजीव मिश्रा यहाँ विभिन्न योजनाओं के उद्धाटन और निरीक्षण के सन्दर्भ में आने वाले है. बहरहाल देखने वाली बात होगी की छपरा जंक्शन का श्रृंगार इस बार कितने दिनों तक लोगों का मन मोह सकेगा.

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