सावधान! सदर अस्पताल में सुई लेने से पहले जरूर करें कर्मचारी की पड़ताल, कही ऐसा ना हो…

सावधान! सदर अस्पताल में सुई लेने से पहले जरूर करें कर्मचारी की पड़ताल, कही ऐसा ना हो…

Chhapra: सफाई व्यवस्था के नाम पर भले ही सदर अस्पताल को पुरस्कार मिल गया हो लेकिन इस अस्पताल की व्यवस्थाओ के कारण आपको परेशानी झेलनी पड़ सकती है.

आये दिन सुविधाओ के नाम पर सदर अस्पताल में बढ़ोत्तरी सिर्फ कागजों पर ही दिख रही है लेकिन असलियत में यहाँ न बेड पर मरीजो के लिए चादर है, ना सुई देने वाले कंपाउंडर या फिर सुई देने के दौरान लगाई जाने वाला सेवलोंन.

कर्मचारियों की कमी से बिचौलिए की बढ़ी है सक्रियता

सदर अस्पताल में इलाज कराने आने वाले मरीजो को सावधान रहने की जरूरत है. अस्पताल में इलाज के लिए चिकित्सक मौजूद है. जिनके द्वारा ईलाज के लिए आवश्यक परामर्श देकर दवाइयां लिखी जाती है. कर्मचारियों की कमी का दंश झेल रहे सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में कदम कदम पर बिचौलियों की जमात खड़ी है. जो डॉ से परामर्श मिलने के साथ ही अपना परामर्श शुरू कर देते है. भीड़ में सरकारी कंपाउंडर को पहचानना मुश्किल है लेकिन अवैध कर्मी तुरंत बिना किसी सुरक्षा नियमो को पालन किये सुई और दवा देना प्रारम्भ कर देते है. मरीज के पास अवैध जांच केंद्रों के कर्मचारियों की टीम पहुंचकर जांच के नाम पर मोटी रकम भी वसूल लेती है. जब तक मरीज और उसके परिजनों को इन सब अवैध कर्मी और जांच केंद्रों का पता चलता है तब तक वह ठगा जा चुका होता है.

साँठ गांठ से चलता है खेल

सदर अस्पताल में यह बड़ा खेल यहाँ के चिकित्सकों और वरीय पदाधिकारियों की सह और साँठ गांठ से होती है इसके लिए उन्हें मोटी रकम और सुविधाएं दी जाती है. पूरे अस्पताल परिसर में बिचौलियों का अड्डा है. बिना किसी ड्रेस कोड के सरकारी कर्मी कार्य करते है जिसका फायदा इन बिचौलियों को होता है.

कभी कभार यह बिचौलिए ही चिकित्सक बन इलाज करते है ऐसे में इस अस्पताल में इलाज करवाना अपनी जान को जोखिम में डालना है.

इसलिए सदर अस्पताल में इलाज कराने और सुई लेने से पहले  कंपाउंडर की जानकारी जरूर ले.

क्या कहते है अस्पताल उपाधीक्षक

सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ दीपक कुमार ने इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अस्पताल के सभी कर्मी चाहे वह चिकित्सक हो कर्मचारी सभी का अपना ड्रेस कोड है. ड्रेस कोड कर्मचारी की पहचान है जिससे मरीज और चिकित्सक को सुविधा होती है. पूर्व में भी कर्मियों को ड्रेस में रहने की हिदायत दी गयी थी लेकिन किसी कारणवश अगर वह ड्रेस में नही रहते है तो पुनः एक बार फिर उन्हें निर्देश दिया जाएगा.

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