जिले के कोरोना संक्रमित मरीज भगवान भरोसे, ना दवा ना परामर्श सिर्फ कागजी खानापूर्ति करने में जुटा स्वास्थ्य महकमा

जिले के कोरोना संक्रमित मरीज भगवान भरोसे, ना दवा ना परामर्श सिर्फ कागजी खानापूर्ति करने में जुटा स्वास्थ्य महकमा

Chhapra: जिले में कोरोना की तीसरी लहर जारी है. ऐसे में राज्य सरकार द्वारा कई तरह की पाबंदियों के साथ नाईट कर्फ्यू लगाया गया है. कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या में कमी है इसके बावजूद अस्पताल आने वाले लोगों की जांच चल रही है.

विगत दिनों प्रशासन द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार जिले में एक्टिव कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या 636 है. जिनमे 33 डिस्ट्रिक्ट आइसोलेशन फसीलिटीज़ के तहत है तो वही 603 होम आइसोलेशन में है. घर मे रहने वाले संक्रमित मरीजों की संख्या ज्यादा है. ऐसे में स्वास्थ्य महकमा सतर्क रहने की बजाय शिथिल है. स्वास्थ्य विभाग द्वारा कोरोना संक्रमित मरीजों के लिए कंट्रोल रूम बनाया गया है.लेकिन इस कंट्रोल रूम से संक्रमित मरीजों के हालचाल की जानकारी नही ली जाती है. हा अगर मरीज चाहे तो प्रतिदिन अपनी स्थिति बताते रहे.

तीसरी लहर में सरकार ने भले ही पाबंदियां लगा दी हो लेकिन विभाग संक्रमित मरीजों की सुधि नही लेता है. ना तो उसे दवा मुहैया कराई जा रही है और ना ही किसी तरह का परामर्श दिया जा रहा है. मरीज को सिर्फ भगवान भरोसे छोड़ दिया जा रहा है.

कोरोना से संक्रमित होने के बाद एक मरीज ने बताया कि स्वास्थ्य महकमा सिर्फ कागजी करवाई में व्यस्त है. प्रचार प्रसार भले ही चरम पर हो लेकिन धरातल पर कुछ नही है.

उनका कहना है कि कोरोना संक्रमण को लेकर सैम्पल दिया गया जिसके 3 दिन बाद रिपोर्ट आया जिसमे वह पोसेटिव पाया गया. विभाग ने फोन से इसकी सूचना दी और दवा डाक के माध्यम से जाने की बात कही गयी, साथ ही किसी तरह की तकलीफ होने पर सम्पर्क करने के लिए कहकर फोन काट दिया गया. मरीज के पास स्वास्थ्य विभाग ने 6 दिन बीतने के बाद अबतक ना दवाई भेजी है और न ही मरीज की सुधि ली. संक्रमित होने के कारण मरीज कही जा भी नही सकता और ना ही इस बात को सुन उसके पास कोई आ रहा है.

स्वास्थ्य विभाग करोडों रुपये कोरोना संक्रमित मरीजों के नाम पर खर्च कर रही है, लेकिन विभागीय कर्मचारी कागजों पर ही इसका निबटारा कर घोटाला कर रहे है.

फिलहाल एक्टिव 603 मरीजों में से कई ऐसे मरीज होंगे जिनके पास ना दवा पहुंची होगी ना किसी तरह की स्वास्थ्य सुविधा मिली होगी.

अब ऐसे में विभाग ने इन मरीजों के नाम पर दवाई किसको भेजी. संक्रमित मरीजों के अगल बगल सेनेटाइजेशन के नाम पर कितनी राशि उठायी गयी. अगर मरीजों को दवाई नही भेजी तो इस लापरवाही का जिम्मेवार कौन है. यह जांच का विषय है.

बहरहाल मरीज किसी न किसी तरह संक्रमण के बाद इलाज करवाकर जीवन बचाने की जुगत में है.

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