कोविड की पाबंदियों से मुश्किल में बैंड पार्टी वाले, व्यवसाय और जीवन-यापन पर पड़ा असर

कोविड की पाबंदियों से मुश्किल में बैंड पार्टी वाले, व्यवसाय और जीवन-यापन पर पड़ा असर

Chhapra: शादियों में बैंड के बिना लोग थिरकते नही हैं, बारात बगैर बैंड के लगती नही है. अपने बैंड की धुन से दूसरों के घरों में खुशियां भरने वाले बैंड पार्टी वालों पर कोविड के कारण सरकार के द्वारा लगाई गई पाबंदियों से मुश्किलों का पहाड़ टूट पड़ा है. इस व्यवसाय में जुटे लोगों के सामने रोजी- रोजगार की गंभीर समस्या उत्पन्न हो गयी है. कोरोना गाइडलाइन  में  शादी समारोहों में बैंड पार्टी की मनाही से इससे जुड़े लोगों, उनके परिवारों को आर्थिक तंगी से जूझना पर रहा है.

सारण जिले के बैंड पार्टी संचालकों ने गुरुवार को सारण के जिलाधिकारी के समक्ष अपनी व्यथा सुनाई. बैंड बाजा का व्यवसाय करने वालों ने जल्द से जल्द शादी समारोहों में बैंड पर लगी रोक को हटाने की मांग की ताकि इससे जुड़े लोगों का घर चल सके.

बैंड पार्टी के संचालक मोहम्मद नईम ने बताया कि सरकार के कोरोना गाइड लाइन के कारण लगभग 3 वर्षों से उनके व्यवसाय पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है. कर्ज लेकर बैंड पार्टी के सदस्यों का घर चल रहा है. अब स्थिति दयनीय हो गयी है अब कोई कर्ज भी देने को तैयार नही है.

उन्होंने कहा कि अगर जल्द से जल्द सरकार बैंड पार्टी वालीं के पक्ष में कोई निर्णय नही लेती तो भुखमरी की स्थिति उत्पन्न हो जाएगी. शादियों में बैंड बाजा बजा कर गुजारा करने वालों के लिए यह बेहद मुश्किल दौर साबित हो रहा है. एक ओर बाजार भी खुल रहें हैं वही बैंड पार्टी पर रोक लगाकर सरकार को कोविड को फैलने से रोकने में क्या सफलता दिख रही है यह सोचनीय है.

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