डेंगू और चिकनगुनिया बीमारी से बचाव के लिए विभिन्न स्तरों पर चलाया जाएगा जागरूकता अभियान: जिलाधिकारी

Chhapra: जल जनित बीमारियों के मौसम की शुरुआत हो चुकी है। इस मौसम में घर के आसपास बहुत से कीटाणुओं के बढ़ने के कारण लोगों के बीमार होने की संभावना काफी बढ़ जाती है। जिस कारण ऐसे मौसम में लोगों को डेंगू और चिकनगुनिया जैसी बीमारी से ग्रसित होने का खतरा मंडारने लगता है।

जिलेवासियों को इसके प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग द्वारा समय-समय पर जागरूकता अभियान चलाया जाता है। जिस दौरान लोगों को डेंगू होने के कारण, पहचानने के लक्षण के साथ- साथ अस्पताल में इसके इलाज के लिए उपलब्ध सुविधाओं के प्रति जागरूक किया जाता है। डेंगू और चिकनगुनिया जैसी बीमारी से जिलेवासियों को जागरूक करने के उद्देश्य से जिलाधिकारी अमन समीर के अध्यक्षता में शनिवार को जिला स्तरीय समन्वय समिति की बैठक आयोजित की गई।

सरकारी अस्पताल के साथ – साथ निजी अस्पतालों में भी डेंगू मरीजों को चिन्हित किया जाए: जिलाधिकारी
जिलाधिकारी अमन समीर द्वारा बताया गया कि बदलते मौसम के साथ जिले में डेंगू मरीजों को सुरक्षित और बचाव को लेकर स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिले के निजी अस्पतालों और पंजीकृत जांच घरों को डेंगू मरीज की जानकारी उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक दिशा- निर्देश दिया जाता है। निजी अस्पताल व जांच घरों से मरीज के डेंगू ग्रसित होने की जानकारी होने की स्थिति में मरीज को सूचित करते हुए उन्हें इलाज कराने की जानकारी दी जाती है। इसके साथ- साथ संबंधित मरीज के परिजनों को भी डेंगू या चिकनगुनिया जांच करवाने का निर्देश दिया जाता है, जिससे कि लोग संबंधित बीमारी की पहचान कर अपना इलाज सुनिश्चित करें। क्योंकि मानसून के कारण कुछ दिनों से लगातार बारिश हो रही है। ऐसे में लोगों को इन बीमारियों से बचाव के उपाय के संबंध में जानकारी अतिआवश्यक हो जाता है। बारिश के समय घर के आसपास पानी का जमाव हो जाता है। स्थिर साफ पानी के जमाव होने से उसमें एडीज मच्छर पनपने लगता है। संक्रमित एडीज मच्छर के काटने से कोई भी व्यक्ति डेंगू या चिकनगुनिया का शिकार हो जाता है। यह मच्छर दिन के समय में ही लोगों को अपना शिकार बनाता है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिला मुख्यालय स्थित सदर अस्पताल और जिले के अन्य स्वास्थ्य केंद्रों में आवश्यक इलाज की व्यवस्था है। जिलेवासियों से अपील की जाती है कि संक्रमित व्यक्ति को डेंगू से सुरक्षा के लिए अपना और अपने परिजनों का ध्यान रखने के साथ लक्षण दिखाई देने की स्थिति में नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच अवश्य करायें।

डेंगू और चिकनगुनिया बीमारी से ग्रसित मरीजों के लिए सदर अस्पताल में 10 तो एसडीएच में 5 जबकि प्रखंड स्तर पर दो बेड सुरक्षित: सिविल सर्जन
सिविल सर्जन डॉ सागर दुलाल सिन्हा ने बताया कि बारिश के मौसम में डेंगू से ग्रसित मरीजों की संख्या काफी बढ़ जाती है। इसके लिए जिले के सभी अस्पतालों में डेंगू वार्ड बनाया जाता है। जहां डेंगू से ग्रसित मरीजों को भर्ती करते हुए उन्हें इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। इसके लिए जिला मुख्यालय सहित सदर अस्पताल में 10 बेड, अनुमंडलीय अस्पताल में 05 बेड तथा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में 2-2 बेड को डेंगू के मरीजों हेतु सुरक्षित रखा गया है। डेंगू के लक्षण दिखाई देने पर प्रखंड स्तरीय अस्पताल में मरीजों की एनएस-1 की जांच होती है। इसमें ज्यादा ग्रसित पाए जाने पर संबंधित मरीजों की सदर अस्पताल में एलिजा टेस्ट कराई जाती है। वहां चिन्हित होने के बाद ही उक्त मरीज को डेंगू ग्रसित मानते हुए इलाज की जाती है। डेंगू एवं चिकनगुनिया बुखार की स्थिति में सभी मरीजों को अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता नहीं होती है। हालांकि समय पर पहचान और इलाज करवाने पर मरीज घर में ही आइसोलेटेड स्थिति में रह सकता हैं। निजी अस्पताल और जांच घरों से जांच के दौरान अगर दूसरे जिला के रहने वाले कोई व्यक्ति डेंगू या चिकनगुनिया ग्रसित पाया जाता हैं तो मरीज को सूचित करने के साथ- साथ संबंधित जिला के विभागीय अधिकारी को भी सूचित किया जाता है। ताकि संबंधित क्षेत्र के लोगों को भी जागरूक करते हुए ग्रसित मरीजों की पहचान कर इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई जा सके।

डेंगू मरीज होने पर संबंधित क्षेत्रों में कराई जाती है फॉगिंग: डॉ दिलीप कुमार
जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ दिलीप कुमार ने बताया कि वर्ष 2024 में फिलहाल डेंगू के मात्र दो मरीजों की पहचान हुई है। हालांकि डेंगू और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों के लिए शहरी क्षेत्र के कटरा, अस्पताल चौक, लाह बाजार, मौना चौक, भगवान बाजार, दहियावां, नई बाजार, रेलवे कॉलोनी तो वहीं रिविलगंज के गोदना मोड़, गड़खा के स्थानीय बाजार ले अलावा बसंत रोड के साथ साथ सोनपुर अनुमंडलीय अस्पताल क्षेत्र के दुधैला और बाकरपुर को हॉट स्पॉट के लिए चिन्हित किया गया है। विभागीय अधिकारियों का ध्यान इन इलाकों में सबसे अधिक है। लेकिन इसके अलावा जिले के सभी क्षेत्रों में डेंगू मरीज की पहचान होने पर संबंधित क्षेत्र के आसपास के घरों में स्वास्थ्य विभाग द्वारा एक सप्ताह के अंदर ही फॉगिंग कराया जाता है। इससे संबंधित क्षेत्र के डेंगू होने वाले मच्छर नष्ट हो जाते हैं। साथ ही अन्य लोग डेंगू ग्रसित होने से सुरक्षित रह सकते हैं। इसके अलावा क्षेत्र के लोगों को भी डेंगू की पहचान के लिए लक्षण की जानकारी देते हुए इलाज के लिए अस्पताल में उपलब्ध सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए जागरूक किया जाता है, ताकि जिलेवासी डेंगू या चिकनगुनिया जैसे बीमारी से सुरक्षित रह सकें।

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