पारा मेडिकल संस्थान और एएनएम स्कूल में चलाया गया जागरूकता अभियान

पारा मेडिकल संस्थान और एएनएम स्कूल में चलाया गया जागरूकता अभियान

छात्र और छात्राओं को तंबाकू सेवन के दुष्प्रभाव को लेकर किया गया जागरूक: मनोवैज्ञानिक

बेवक्त आने वाली मौत का मुख्य कारण तंबाकू उत्पाद, लेकिन इसके लिए सामाजिक चेतना अतिआवश्यक: एनसीडीओ

बिहार में अधिकांश मुंह कैंसर का मुख्य कारण तंबाकू सेवन: सिविल सर्जन

chhapra: विश्व तंबाकू निषेध दिवस के अवसर पर सदर अस्पताल परिसर स्थित पारा मेडिकल संस्थान के अलावा एएनएम स्कूल में जागरूकता अभियान चलाया गया। जिसमें छात्र—छात्राओं को तंबाकू की लत से होने वाले नुकसान तथा बचने के उपायों की जानकारी दी गई। इस अवसर पर गैर – संचारी रोग पदाधिकारी (एनसीडीओ) डॉ भूपेंद्र कुमार, फिजियोथैरेपिस्ट वरुण कुमार सिंह, मनोवैज्ञानिक निधि कुमारी, एएनएम स्कूल की प्राचार्या काजल कुमारी सहित अन्य कर्मी मौजूद थे। वहीं पारा मेडिकल संस्थान तथा एएनएम स्कूल के छात्र- छात्राओं द्वारा विश्व तंबाकू निषेध दिवस के अवसर पर पेंटिंग भी बनाया गया। जिसमें छोटू कुमार, गजेंद्र कुमार, राधा कुमारी, काजल कुमारी, प्रवीण कुमार, विवेक कुमार, शशिकांत, अनुभा कुमारी, खुशबू कुमारी, प्रियंका, नेहा, ज्योति, कल्पना, साक्षी, मनीषा कुमारी ने भाग लिया।

छात्र—छात्राओं को तंबाकू सेवन के दुष्प्रभाव को लेकर किया गया जागरूक: मनोवैज्ञानिक

मनोवैज्ञानिक निधि कुमारी ने बताया कि विश्व तंबाकू निषेध दिवस के अवसर पर स्कूली छात्र और छात्राओं से अपील किया गया की अपने आस पास के वैसे लोग जो तंबाकू का सेवन कर रहे है, वैसे लोगों को इसके दुष्प्रभाव को लेकर जागरूक करने की आवश्यकता है। तभी हमलोग इसको सार्थक रूप दे सकते हैं। हालंकि इसके साथ ही उस्पथित सभी छात्रों से जिंदगी में कभी भी तंबाकू सेवन नही करने के लिए शपथ दिलाई गई। क्योंकि तंबाकू का सबसे अधिक दुष्प्रभाव स्कूली बच्चों और युवाओं पर हो रहा है। बिहार में तंबाकू का प्रयोग करने वाले 25.9 प्रतिशत, धुआं रहित तंबाकू यानी पान मसाला, जर्दा, खैनी का प्रयोग करने वाले 23.5 प्रतिशत, बीड़ी पीने वाले 4.2 प्रतिशत और सिगरेट पीने वाले 0.9 प्रतिशत लोग हैं।

बेवक्त आने वाली मौत का मुख्य कारण तंबाकू उत्पाद, लेकिन इसके लिए सामाजिक चेतना अतिआवश्यक: एनसीडीओ
जिला गैर संचारी रोग पदाधिकारी (एनसीडीओ)

डॉ भूपेंद्र कुमार ने कहा कि तंबाकू सेवन के कारण कैंसर, ह्रदय रोग जैसी बीमारियों की समस्या बढ़ती जा रही है। लेकिन तंबाकू, सिगरेट व्यवसाय जैसे शक्तिशाली व्यावसायिक समूह से मुकाबला करने के लिए सामाजिक चेतना अतिआवश्यक है। क्योंकि युवाओं में नशा करना भले ही शान और लत के लिए किया जाता हो। लेकिन यह जिंदगी में बेवक्त आने वाली मौत का मुख्य कारण भी माना जाता है। हालांकि लोग भले ही इसका मजा कुछ पल के लिए करते हैं लेकिन यह मजा कब लोगों लिए जिंदगी भर की सजा बन जाए, इसका अंदाजा भी नहीं लगा सकते है। तंबाकू का सेवन जन स्वास्थ्य के लिए बड़े खतरों में से एक माना जा रहा है। क्योंकि सार्वजनिक स्थानों पर तंबाकू सेवन के बाद थूकना स्वास्थ्य के लिए काफ़ी खतरा होता है। तंबाकू सेवन करने वाले की प्रवृति यत्र-तत्र थूकने की होती है। थूकने के कारण कई गंभीर प्रकार की गंभीर बीमारी तथा कोरोना, इंसेफलाइटिस, यक्ष्मा, स्वाइन फ्लू आदि का संक्रमण फैलने की आशंका रहती है।बिहार में अधिकांश मुंह

कैंसर का मुख्य कारण तंबाकू सेवन: सिविल सर्जन

सिविल सर्जन डॉ सागर दुलाल सिन्हा का कहना है कि तंबाकू सेवन की रोकथाम को लेकर विभागीय स्तर से दो स्तरों पर कार्य किया जा रहा है। जिसमें पहला सरकार एवं सहयोगी संस्थाओं के साथ मिलकर, दूसरा समाज में जागरूकता अभियान चलाकर शत प्रतिशत रोकथाम लागू करने के लिए हमलोग कटिबद्ध है। आगे उन्होंने यह भी कहा कि कैंसर स्क्रीनिंग और जागरूकता अभियान जिले में शुरुआत की जा चुकी है। सबसे अहम बात यह है कि 40% कैंसर सिर्फ तंबाकू के सेवन से होता है। बिहार में सबसे ज्यादा मुंह का कैंसर होता है जिसमें 90% कैंसर तंबाकू सहित बीड़ी, सिगरेट, गांजा आदि के सेवन से होता है। तंबाकू का सेवन करने वाला सिर्फ अपना नहीं बल्कि आने वाली नस्लों को भी खराब कर देता है। अगर कोई गर्भवती महिला तंबाकू का सेवन करती है तो इससे उनके होने वाले बच्चे पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है। जैसे- जन्म के समय ही मृत्यु हो जाना, बच्चे का सही तरीके से विकास नहीं होना, कम वजन का बच्चा होना या कोई गंभीर बीमारी से ग्रसित होना। तंबाकू का सेवन करने से आपके जीवन से 11 साल कम हो जाता है। तंबाकू सिर्फ हमारे स्वास्थ्य को ही नहीं बल्कि हमारे पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचा रहा है।इसीलिए तम्बाकू का सेवन सभी लोग अविलंब छोड़ें।

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