गांवों में बाजार लगाने की सालों पुरानी प्रथा अब विलुप्ति के कगार पर है. एक समय था जब प्रत्येक गाँव में निर्धारित दिन, तिथि को बाजार लगता था. कुछ समय पहले तक शहरों की तरह गावों में स्थाई दुकानें नही हुआ करती थी. कई घरो के चूल्हे इन बाजारों से होनीRead More →