(आशुतोष श्रीवास्तव) लोक कलाकार नवजागरण और भोजपुरी मिट्टी के सोंधी सुगंध के प्रतिक राय बहादुर भिखारी ठाकुर. जिन्होने न सिर्फ उत्तर बिहार मे वरण पूरे उत्तर भारत के समस्त भाषा-भाषी क्षेत्रों अपनी कालजयी रचनाओं के माध्यम से समाजिक रूढ़िया और विषमताओं के विरूद्ध लोक संस्कृति के विभिन्न माध्यमों से समाजRead More →

                  युवा ख़्वाब और हक़ीक़त का फांसला मिटाकर रहेगा युवा । बढ़ते रहा है और बढ़ता रहेगा युवा ।। ना रुके बहती हवा,ना बहता पानी,ना  जज़्बा-ए-यौवन। दुनिया जो भी हो तेरी रीत,तेरा चलन।। उसेे तो पाना है वो मुकम्मल मंज़िल। चाहें पार करनेRead More →

‘वक्त आने दे बता देंगे तुझे ऐ आस्मां, हम अभी से क्या बताएं क्या हमारे दिल में है’ उनका वक्त भी आया और उन्होंने खुद को साबित भी कर दिया. उन्होंने साबित कर दिया कि एक सच्चे भारतीय के लिए उसका देश ही सबकुछ है. समर्पण, त्याग, शहादत और बलिदानRead More →

आज जब सब तरफ लोग पुराने रीती-रिवाजो को भुल कर एक नई संस्कृति की गाथा रचने में लगे पड़े है. ऐसे में जब भी यह विचार आता है की वह कौन सा व्रत, पर्व या आयोजन है जो आने वाले कई दशकों तक अपनी संस्कृति और महत्ता बनाये रखने मेंRead More →

गांवों में बाजार लगाने की सालों पुरानी प्रथा अब विलुप्ति के कगार पर है. एक समय था जब प्रत्येक गाँव में निर्धारित दिन, तिथि को बाजार लगता था. कुछ समय पहले तक शहरों की तरह गावों में स्थाई दुकानें नही हुआ करती थी. कई घरो के चूल्हे इन बाजारों से होनीRead More →