ये तस्वीरें हाल ही में मेरे द्वारा उड़िशा के कंधमाल के आदिवासी इलाके में फील्डवर्क के दौरान ली गयीं है। तस्वीरे तो बस सिमित दायरे में ही तथ्यों को रख पा रही है बाकी मैं वास्तविकता अपनी आँखों से देख बहुत विचलित हुआ। यानि की जंगल को लूटने या दोहनRead More →

{अमन कुमार}: आज विश्व स्वास्थ्य दिवस है. अपनी भाग दौड़ भरी जिंदगी में सभी स्वस्थ तो रहना चाहते हैं. लेकिन, आज की स्थिति कुछ और ही तस्वीर बयां करती है. लोगों पर बढ़ते काम के बोझ और पैसे कमाने की ललक ने उन्हें अपने हेल्थ के प्रति लापरवाह बना दियाRead More →

(अमन कुमार) बिहार जिसे पूर्व में मगध के नाम से जाना जाता था.1912 में बंगाल के विभाजन के समय अस्तित्व में आया बिहार भारत का एक ऐसा राज्य है जो अपनी सांस्कृतिक छटा के लिए बखूबी जाना जाता है. बिहार भारत के इतिहास में साहित्यिक, ऐतिहासिक, धार्मिक सभी स्तर परRead More →

“बुरा ना मानो होली है”-खुशी के साथ ये वाक्य बोलने और एक-दूसरे पर रंग-गुलाल उड़ेलने का वो दिन,वो होली फिर आ गई। दिलों के खिलने और एक- दूसरे से मिलने वाले इस त्यौहार का अपना ही मज़ा है। ये दिन विभिन्न प्रकार के रिश्तों के बीच एक अनोखा मिठास घोलRead More →

आई रे! आई रे! आई रे! आई फिर रंग-बिरंगी होली। रंग खिले,गुलाल उड़े, खुशियों से भर गई झोली।। आई रंग-बिरंगी होली…….. बच्चे नाचें पहन मुखौटा, देख लागें भूत-पिशाच। गीले-शिकवे भूली दुनिया, भूल गए सारे झूठ-साच।। आई  रंग-बिरंगी होली……. क्या युवा,क्या बूढ़े, सबकी है अपनी टोली। मची रे! मची हुड़दंग, पिचकारीRead More →

(कबीर की कलम से) पढ़ते के साथ आपको अपने बचपन के दिनों की याद जरुर ताज़ा हो गई होंगी. अब ये खेल देखने को भी नही मिलता. जब दोस्त-साथी मिलते तो एक बार इस खेल की चर्चा जरुर हो जाती है. भले ही मोबाइल के गेम ने इन खेलों कीRead More →

{अमन कुमार} 8 मार्च को प्रत्येक वर्ष महिलाओं के सम्मान में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है. महिलाएं जो हमारे समाज में कई किरदारों को निभाती हैं. चाहे वो एक बेटी हो या फिर एक बहन, बहु से लेकर एक माँ, दादी या फिर नानी का, हमारे भारतीय समाज मेंRead More →

कबीर आप इसे शौक कहेंगे या नादानी. करतब कहें या बेवकूफी पर आज की युवा पीढ़ी मोटरबाइक को जिस रफ़्तार से चला रही है, उसे देख कर इतना जरूर कहा जा सकता है कि मोटर बाइक की रेस में युवा पीढ़ी अपनी जिंदगी के रेस में हारती नजर आ रहीRead More →

(आशुतोष श्रीवास्तव) लोक कलाकार नवजागरण और भोजपुरी मिट्टी के सोंधी सुगंध के प्रतिक राय बहादुर भिखारी ठाकुर. जिन्होने न सिर्फ उत्तर बिहार मे वरण पूरे उत्तर भारत के समस्त भाषा-भाषी क्षेत्रों अपनी कालजयी रचनाओं के माध्यम से समाजिक रूढ़िया और विषमताओं के विरूद्ध लोक संस्कृति के विभिन्न माध्यमों से समाजRead More →

                  युवा ख़्वाब और हक़ीक़त का फांसला मिटाकर रहेगा युवा । बढ़ते रहा है और बढ़ता रहेगा युवा ।। ना रुके बहती हवा,ना बहता पानी,ना  जज़्बा-ए-यौवन। दुनिया जो भी हो तेरी रीत,तेरा चलन।। उसेे तो पाना है वो मुकम्मल मंज़िल। चाहें पार करनेRead More →

‘वक्त आने दे बता देंगे तुझे ऐ आस्मां, हम अभी से क्या बताएं क्या हमारे दिल में है’ उनका वक्त भी आया और उन्होंने खुद को साबित भी कर दिया. उन्होंने साबित कर दिया कि एक सच्चे भारतीय के लिए उसका देश ही सबकुछ है. समर्पण, त्याग, शहादत और बलिदानRead More →

आज जब सब तरफ लोग पुराने रीती-रिवाजो को भुल कर एक नई संस्कृति की गाथा रचने में लगे पड़े है. ऐसे में जब भी यह विचार आता है की वह कौन सा व्रत, पर्व या आयोजन है जो आने वाले कई दशकों तक अपनी संस्कृति और महत्ता बनाये रखने मेंRead More →