Chhapra (कबीर): विगत सालों में लगातार लापरवाही की वजह से लंबित होती परीक्षाएं और फिर छात्र संघ चुनाव की घोषणा के बाद छात्र और छात्र संघ की नींद टूटी है. देर ही सही छात्र जागे है, कुछ अच्छा होने की उम्मीद भी जगी है. डिजिटल क्रांति के इस दौर में छात्रRead More →

अपराधी का इंटरव्यू इस शीर्षक से आप भी सोचेंगे कि अपराधी का इंटरव्यू छापने, बताने की क्या जरूरत पड़ी. सिस्टम, समाज और मजबूरी इंसान को अपराध और अपराध के रास्ते पर कब ला खड़ा करती है पता नही चलता. पढ़िए कबीर अहमद से सुपारी किलर की बातचीत के अंश…. भूख,Read More →

खुशनसीब है जो तुझे मां मिली है, तेरी ज़िन्दगी को नई, पहचान मिली है। भूल कर भी ना करना, रुसवा उसको कभी। देख तुझे मां नहीं, तुझको भगवान मिली है।। रोशनी को भी कर दे जो ज्यादा रौशन, तेरे घर को ऐसी रोशनदान मिली है। बेकार के उन रिश्तों में,Read More →

ये तस्वीरें हाल ही में मेरे द्वारा उड़िशा के कंधमाल के आदिवासी इलाके में फील्डवर्क के दौरान ली गयीं है। तस्वीरे तो बस सिमित दायरे में ही तथ्यों को रख पा रही है बाकी मैं वास्तविकता अपनी आँखों से देख बहुत विचलित हुआ। यानि की जंगल को लूटने या दोहनRead More →

{अमन कुमार}: आज विश्व स्वास्थ्य दिवस है. अपनी भाग दौड़ भरी जिंदगी में सभी स्वस्थ तो रहना चाहते हैं. लेकिन, आज की स्थिति कुछ और ही तस्वीर बयां करती है. लोगों पर बढ़ते काम के बोझ और पैसे कमाने की ललक ने उन्हें अपने हेल्थ के प्रति लापरवाह बना दियाRead More →

(अमन कुमार) बिहार जिसे पूर्व में मगध के नाम से जाना जाता था.1912 में बंगाल के विभाजन के समय अस्तित्व में आया बिहार भारत का एक ऐसा राज्य है जो अपनी सांस्कृतिक छटा के लिए बखूबी जाना जाता है. बिहार भारत के इतिहास में साहित्यिक, ऐतिहासिक, धार्मिक सभी स्तर परRead More →

“बुरा ना मानो होली है”-खुशी के साथ ये वाक्य बोलने और एक-दूसरे पर रंग-गुलाल उड़ेलने का वो दिन,वो होली फिर आ गई। दिलों के खिलने और एक- दूसरे से मिलने वाले इस त्यौहार का अपना ही मज़ा है। ये दिन विभिन्न प्रकार के रिश्तों के बीच एक अनोखा मिठास घोलRead More →

आई रे! आई रे! आई रे! आई फिर रंग-बिरंगी होली। रंग खिले,गुलाल उड़े, खुशियों से भर गई झोली।। आई रंग-बिरंगी होली…….. बच्चे नाचें पहन मुखौटा, देख लागें भूत-पिशाच। गीले-शिकवे भूली दुनिया, भूल गए सारे झूठ-साच।। आई  रंग-बिरंगी होली……. क्या युवा,क्या बूढ़े, सबकी है अपनी टोली। मची रे! मची हुड़दंग, पिचकारीRead More →

(कबीर की कलम से) पढ़ते के साथ आपको अपने बचपन के दिनों की याद जरुर ताज़ा हो गई होंगी. अब ये खेल देखने को भी नही मिलता. जब दोस्त-साथी मिलते तो एक बार इस खेल की चर्चा जरुर हो जाती है. भले ही मोबाइल के गेम ने इन खेलों कीRead More →

{अमन कुमार} 8 मार्च को प्रत्येक वर्ष महिलाओं के सम्मान में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है. महिलाएं जो हमारे समाज में कई किरदारों को निभाती हैं. चाहे वो एक बेटी हो या फिर एक बहन, बहु से लेकर एक माँ, दादी या फिर नानी का, हमारे भारतीय समाज मेंRead More →

कबीर आप इसे शौक कहेंगे या नादानी. करतब कहें या बेवकूफी पर आज की युवा पीढ़ी मोटरबाइक को जिस रफ़्तार से चला रही है, उसे देख कर इतना जरूर कहा जा सकता है कि मोटर बाइक की रेस में युवा पीढ़ी अपनी जिंदगी के रेस में हारती नजर आ रहीRead More →

(आशुतोष श्रीवास्तव) लोक कलाकार नवजागरण और भोजपुरी मिट्टी के सोंधी सुगंध के प्रतिक राय बहादुर भिखारी ठाकुर. जिन्होने न सिर्फ उत्तर बिहार मे वरण पूरे उत्तर भारत के समस्त भाषा-भाषी क्षेत्रों अपनी कालजयी रचनाओं के माध्यम से समाजिक रूढ़िया और विषमताओं के विरूद्ध लोक संस्कृति के विभिन्न माध्यमों से समाजRead More →