बिहार विधान परिषद के कार्यकारी सभापति ने अपनी जिंदगी से जुड़े कई किस्से किये साझा

बिहार विधान परिषद के कार्यकारी सभापति ने अपनी जिंदगी से जुड़े कई किस्से किये साझा

Patna: ‘ए जिंदगी तेरा शुक्रिया हम कहां कहां से गुजर गए’बिहार विधान परिषद के कार्यकारी सभापति अवधेश नारायण सिंह आज दूरदर्शन बिहार के बेहद खास कार्यक्रम बिहार बिहान में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होने के दौरान ये पंक्तियां कहीं.

सुबह 8:00 से 9:00 तक लाइव प्रसारित हुए इस 1 घंटे के कार्यक्रम में सभापति अवधेश नारायण सिंह ने बिहार विधानपरिषद के उद्देश्य और उसके कार्य करने के तरीकों को दर्शकों से साझा करने के साथ अपने राजनीतिक सफर और जिंदगी के कई दिलचस्प किस्से दर्शकों से साझा किये. इस कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि विधान परिषद के सदस्य पूरे सूबे से चुनकर आते हैं कई विधानसभा क्षेत्रों के कई जिलों में सदस्यों का क्षेत्र होता है. क्षेत्र की जनता की आशा आकांक्षा पार्षद पर टिकी होती है. ऐसे में सदन के सभी सदस्य के लिए यह जरूरी होता है कि वह सदन की एक एक पल का सदुपयोग करें. उन्होंने आगे कहा कि बिहार विधान परिषद के सभी सदस्य काफी विचारवान है, किसी भी सदस्य को दूसरे सदस्यों से किसी तरह कटुता नहीं होती है. किसी सवाल को लेकर अगर सदन में कभी हंगामा होता भी है तो हम लोग थोड़ी देर में ही माहौल ठीक कर लेते हैं.

रजाई में छुपकर करते थे पढ़ाई

उन्होंने बिहार विधान परिषद स्थापना से लेकर अब तक के कार्यवाही और परंपरा का जिक्र करते हुए सदन के संचालन की बारीकियों से दर्शकों को सरल भाषा में अवगत कराया. उन्होंने कहा कि जिस विश्वास के साथ मुझे चुना गया है और सभापति की जिम्मेदारी मिली है मेरी कोशिश रहती है कि हमेशा ईमानदारी इसका निर्वाहन करूं.

इस कार्यक्रम में उन्होंने अपने बचपन और पढ़ाई के दिनों को भी याद करते हुए कई दिलचस्प किस्से साझा किये. उन्होंने बताया बचपन से ही वह इंजीनियर बनना चाहते थे, इसके लिए काफी मेहनत भी करते थे, पढ़ाई करने के दौरान पढ़ाई वो रजाई से मुंह ढक कर पढ़ाई करते थे ताकि कोई उन्हें पढ़ते हुए ना देखे. साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि बचपन से ही उनका झुकाव कृषि की और भी था. वह बचपन से ही खेती बाड़ी में हाथ भी बंटाते थे.

अनाथ और गरीब लड़कियों की पढ़ाई में कर रहे मदद

बिहार विधान परिषद के कार्यकारी सभापति अवधेश नारायण सिंह ने इस विशेष कार्यक्रम में बताया कि वे अपने खास मुहिम के तहत गरीब और अनाथ लड़कियों की पढ़ाई में मदद कर रहे हैं. इनकी मदद से कई अनाथ और बेसहारा लड़कियां उच्च शिक्षा प्राप्त कर अब नौकरी भी कर रही हैं.

अनोखे ओल्ड एज होम बनाने की है तमन्ना
सभापति अवधेश नारायण सिंह ने बताया कि उनकी दिली तमन्ना एक अनोखे ओल्ड एज होम के निर्माण की है इस ओल्ड एज होम में वृद्ध लोगों के रहने की समुचित व्यवस्था होगी, और वहां एक बेहतर अस्पताल के साथ-साथ बच्चों का स्कूल भी होगा जिस में वृद्धजन शिक्षण का कार्य भी कर सकें. इससे जहां ओल्ड एज होम में रहने वाले लोगों के अनुभव का लाभ बच्चों को मिल सकेगा वही उनका वृद्धजनों का मन भी रमा रहेगा. उन्होंने कहा कि इसके लिए वह अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा इकट्ठा कर रहे हैं.

पत्नी ने हमेशा दिया हौसला

सभापति अवधेश नारायण सिंह ने कहा की पत्नी ने उन्हें हमेशा हौसला दिया. एक वक्त ऐसा भी था जब नौकरी छोड़कर राजनीति में आने के बाद उनकी माली हालत खराब हो गई थी और वह फिर से नौकरी की तलाश में थे, तो पत्नी ने उन्हें हौसला दिया और राजनीति में ही आगे बढ़ने की सलाह दी. आज भी समय-समय पर पत्नी से हर बुरे वक्त में हौसला मिलता रहता है.

उदास होते हैं तो चले जाते हैं माता रानी की शरण में

सभापति अवधेश नारायण सिंह ने बताया कि जब भी जिंदगी में बुरा वक्त आया या कभी ज्यादा उदासी महसूस हुई तो वह सीधे विंध्याचल जा माता रानी की आराधना में जुट जाते हैं वहां से उन्हें असीम शांति मिलती है.

वाजपेयी, मोदी और नीतीश प्रेरणा स्रोत

अवधेश नारायण सिंह ने बताया कि राजनीति की शुरुआत से ही अटल बिहारी बाजपेयी उनके प्रेरणास्रोत रहे हैं. आज के दौर में देश में नरेंद्र मोदी और बिहार में नीतीश कुमार प्रेरणास्रोत है. इनसे बेहतर और स्वच्छ राजनीति करने की की प्रेरणा लोकजन को मिलती है.

इंजीनियरिंग के छात्र रहे हैं अवधेश नारायण

हम आपको बता देंगे विधान परिषद के कार्यकारी सभापति अवधेश नारायण सिंह का जन्म 22 जनवरी 1948 को भोजपुर छोटे से गांव कोथुवा गांव में हुआ. बचपन से ही प्रतिभा के धनी अवधेश नारायण सिंह की प्रारंभिक शिक्षा पीरो में ही हुई. कॉलेज की पढ़ाई के लिए बीएन कॉलेज पटना है फिर उनका नामांकन बीआईटी सिंदरी में हो गया. वहीं से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की. बाद में काम के दौरान ही इसके बाद इनका झुकाव समाज सेवा और राजनीति की ओर होता चला गया. मार्च 1993 में यह स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से निर्वाचित होकर बिहार परिषद के सदस्य बने. इनकी विनम्रता और एक कार्य कुशलता को देखते हुए इन्हें दो बार विधान परिषद का भी चीफ व्हिप बनाया गया. मार्च 2008 से नवंबर 2010 तक यह बिहार सरकार में कैबिनेट मिनिस्टर रहे. अवधेश नारायण सिंह की छवि एक बेहद गंभीर और सुलझे हुए इंसान के तौर पर होती है। हमेशा से पक्ष और विपक्ष दोनों के चहेते रहे हैं.

युवाओं को अपने प्रति ईमानदार रहने की दी सलाह

दूरदर्शन के बिहार बिहान कार्यक्रम में उन्होंने युवाओं को अपने प्रति ईमानदार रहने की सलाह दी उन्होंने कहा कि अगर आप अपने प्रति ईमानदार रहते हैं तो ईश्वर आपकी हमेशा मदद करता है.

पटना दूरदर्शन के कार्यक्रम अधिशासी सह प्रस्तुतकर्ता मनोज प्रभाकर ने बताया कि पटना दूरदर्शन के इस कार्यक्रम को दर्शकों की काफी सराहना मिली. उन्होंने अतिथि के तौर पर अपना बहुमूल्य समय निकालने के लिए बिहार विधान परिषद के कार्यकारी सभापति अवधेश नारायण सिंह का शुक्रिया भी किया.

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