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21 Nov 2017      

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डोरीगंज(दिग्विजय सिंह ‘बबलू’): सदर प्रखण्ड के डोरीगंज के पास का खनुआ नाला जो आज अतिक्रमण का शिकार है एवं यह एक मात्र कचरा का डस्टबीन बन कर रह गया है. यह नाला डोरीगंज के पास गंगा नदी से होकर चिरान्द, डोरीगंज बाजार जलालपुर गाँव से निकलकर काजीपुर मानुपुर जहाँगीर चवँर तक जाती है. जहाँ यह खनुआ नाला पहले दर्जनों गाँवों के सैकड़ों एकड़ खेतों मे पानी पहुँचाया करती थी वह आज कचड़े के ढ़ेर एवं अतिक्रमण मे दबी पड़ी है.

इस नाले की सफाई को लेकर अनेकों बार किसानों ने सड़क जाम एवं प्रदर्शन किया साथ ही प्रखण्ड से लेकर जिले के आला अधिकारियों से गुहार लगाई लेकिन आज तक कोई ठोस परिणाम नही निकल सका केवल कोड़े आश्वासन मिलते रहे. सफाई के नाम पर केवल जे सी बी से नाले से कचड़ा निकाल कोरम पुरा किया जाता रहा है. लेकिन इस बार तो वह कोरम भी पुरा नही किया गया जिसका परिणाम है कि इस बार नदी का पानी खेतों तक नही पहुँच पाया. एक तों बरसात कम होने से फसल सुख रहे है और उस पर नाला जाम होने से नदी का पानी भी चवँर मे नही आने से विकट स्थिति उत्पन्न हो गयी है. किसानों के खरीफ फसल तो बर्बाद हो ही चुके है और उसमे नदी का पानी नही आने से रबि फसल पर भी संकट मडराने लगे है पानी नही आने से रबि फसल की बुआई नही हो पाएगी.

किसानो पर दोहरी मार पड़ती दिख रही है वही जलालपुर पंचायत के दोनों स्टेट ट्युबवेल भी बन्द पड़े है. इसके लिए भी कई बार किसान संबन्धित विभाग से गुहार लगाकर थक चुके है. लेकिन परिणाम सिफर रहा है दोनो ट्युबवेल मे बिजली कनेक्सन भी हो गए है लेकिन बन्द पड़े है. किसान सुमन राय, मनोज कुमार, हरेराम राय, अरविन्द सिंह, अवधेश उपाध्याय, देवेन्द्र सिंह, राजबंशी सिंह आदि किसानों ने कहा कि वर्षो से यह खनुआ नाला किसानों के खेतों तक पानी पहुँचाया करती है. लेकिन खनुआ नाला जाम होने एवं सरकार की उदासीनता के कारण आज फसल सुख रहे है जब तक इस नाला को अतिक्रमण मुक्त एवम पक्की करण नही किया जाता तब तक इसका ठोस निदान नही निकल सकता  यह नाला गंगा नदी से काजीपुर मानुपुर चँवर तक जाती है.

जिससे जलालपुर, काजीपुर, मानुपुर जहाँगीर, मीरपुर जुअरा, कोठिया, परानराय का टोला, नराँव, मदनपुर, घनौरा, कसीना पिरारी जिल्काबाद टहल टोला जिगना हेमतपुर पिरौना, रसलपुरा, धर्मपुरा, सहित दर्जनो गाँवो के लगभग पाँच हजार एकड़ फसल की सिचाई होती है, जो नाला जाम होने से गंगा नदी का पानी चँवर मे नही जा पा रहा है, जिससे किसान सुखे की मार झेल रहे है फसल प्रभावित हो रहे है. 70 के दशक मे सरकार द्वारा गंगा नदी मे पम्पिंग सेट लगाकर खनुआ नाला के माध्यम से खेतो तक पानी पहुचाई जाती थी.

आज नाला अतिक्रमण एवं सरकार के उदासीनता के कारण इन किसानो के सामने बिकट स्थिति उत्पन्न हो गयी है. इसको लेकर किसानो ने २०१४ मे आन्दोलन किया था तब जाकर सफाई करायी गयी थी लेकिन उसके बाद से नाला जाम पड़ा हुआ है. जब तक इस नाला का पक्कीकरण नही की जाती तब तक इस समस्या का स्थायी समाघान नही हो सकता है.

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