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12 Dec 2017      

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Chhapra: बिहार को दहेज़ मुक्त शादी वाले राज्य निर्माण के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कल्पना को आम जनता का भरपूर समर्थन मिल रहा है.गांव से लेकर शहर तक शादियों में दहेज लेने और देने की परंपरा अब बदल रही है. पढ़े लिखे लोगों के साथ साथ साक्षर लोगों में भी दहेज के प्रति बदल रही मानसिकता एक बेहतर बिहार के निर्माण में अहम भूमिका का निभाने वाला है.

समाज की सहभागिता से मुख्यमंत्री के अभियान को अब गति मिल रही है एक के बाद एक जिले में ऐसी कई शादियों का आयोजन किया जा रहा है जिसमे ना तो दहेज़ लिया गया है और ना ही दहेज दिया गया है.

विगत दिनों एकमा से सटे प्रसिद्ध महेंद्रनाथ मंदिर में शादी समारोह का आयोजन किया गया.जिसमे जिले के रिविलगंज के मैनपुरा निवासी बुटन राय की पुत्री कुमारी नेहा की शादी सिवान जिले के आंदर गांव निवासी राजेंद्र राजभर का सुपुत्र संजीत राय के साथ संपन्न हुई.

शादी समारोह का आयोजन रिविलगंज के शिक्षक
राजेश तिवारी एवं उनकी पत्नी निधि कुमारी द्वारा आयोजित किया गया था. दोनों ही दंपतियों द्वारा गरीब परिवार की शादी धूम धाम से कराई गई. इस शादी में ना ही वर पक्ष द्वारा किसी प्रकार के दहेज की मांग की गई और ना ही वधु पक्ष द्वारा ही किसी तरह का दहेज दिया गया. शिक्षक दंपति द्वारा इस शादी के लिए बीड़ा उठाया गया था. जिसके साक्षी सैकड़ो लोग बने.

वही दूसरी ओर अपनी बेहतर सोंच और समाज मे एक संदेश देते हुए जलालपुर की शिक्षिका ने अपने इंजीनियर बेटे की शादी बिना दहेज शिक्षक की पुत्री से तय करते हुए ना सिर्फ अपने आपसी संबंधों को प्रगाढ़ किया बल्कि समाज मे एक संदेश भी दिया.जलालपुर की विधायक कालोनी निवासी एवं शिक्षिका निर्मला पाठक द्वारा अपने इंजीनियर बेटे अनुज पाठक की शादी पास के ही मिश्रवलिया निवासी राकेश कुमार मिश्र की पुत्री से तय की है.

शादी तय होने के साथ ही गांव में इस बात की चर्चा ने जोड़ पकर लिया कि बिना दहेज लिए ही इंजीनियर की शादी हो रही है. इस बात को काफी सराहना भी मिल रही है.

इस संबंध में मुखिया राजेश मिश्र ने बताया कि शिक्षित वर्ग हमेशा समाज को संदेश देने का कार्य करता है. दहेज लेना और देना कानूनन अपराध है इसके बावजूद भी दहेज लेकर शादियां हो रही है.शिक्षिका के इस फ़ैसले से समाज को एक संदेश मिला है समाज मे परिवर्तन हो रहा है. जो आवश्यक है.

वही प्रखण्ड संसाधन केंद्र के प्रखंड संसाधन कर्मी शिक्षक अखिलेश्वर पांडेय ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा बिहार में दहेज प्रथा की समाप्ति के लिए अभियान चलाया जा रहा है. जन सहभागिता के बिना इस अभियान की सफलता नही हो सकती है.जिसमे शिक्षिका का यह फैसला काफी हितकर साबित होगा. शिक्षक समाज के लिए पथ प्रदर्शक होता है. शिक्षिका निर्मला पाठक ने दहेज मुक्त शादी की पहल कर समाज को एक संदेश देने का काम किया है. जिससे शिक्षिका ने अपने कार्य के उद्देश्य को पूरा किया है. इस कार्य से दहेज मुक्त बिहार निर्माण की कल्पना को काफी बल मिलेगा.

इसके अलावे मनोज मिश्र, समन्वयक मनीन्द्र पाण्डेय, शेखर पाण्डेय सहित कई अन्य भी इस कार्य की सराहना की.

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