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22 Nov 2017      

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New Delhi/Pune: यदि लोग रेस्तरां में इंतजार कर सकते हैं, सिनेमाघरों में टिकट के लिए लंबी कतारों में खड़े हो सकते हैं, या पार्टी के आयोजन स्थलों पर खड़े हो सकते है, तो फिर वे सिनेमाघरों में राष्ट्रगान के लिए महज 52 सेकंड तक खड़े क्यों नहीं हो सकते?. ये सवाल अभिनेता अनुपम खेर ने किया है.

अनुपम खेर ने पुणे में एक कार्यक्रम के दौरान सिनेमाघरों के अंदर राष्ट्रगान को अनिवार्य रूप से बजाए जाने के विचार का विरोध करने वालों की जमकर आलोचना की. उन्होंने कहा कि कुछ लोगों का मानना है कि राष्ट्रगान के समय खड़े होना अनिवार्य नहीं होना चाहिए, लेकिन मेरे लिए राष्ट्रगान के लिए खड़े होना उस व्यक्ति की परवरिश को दिखाता है. हम जिस तरह से अपने पिता या शिक्षक के सम्मान में खड़े होते हैं, ठीक उसी तरह राष्ट्रगान के लिए खड़ा होना अपने देश के प्रति सम्मान को दर्शाता है.

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